नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025: OpenAI के CEO सैम अल्टमैन ने हाल ही में एक ट्वीट कर भारत में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के तेजी से बढ़ते अपनाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत में AI का जिस तरह से विस्तार हो रहा है, वह अद्भुत है। रचनात्मकता का यह विस्फोट—भारत दुनिया को पीछे छोड़ रहा है।” इस ट्वीट को 3.4 मिलियन से अधिक बार देखा गया है, जो भारत में AI के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।

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भारत में AI का वर्तमान परिदृश्य
पिछले 3 वर्षों में भारत में AI का उपयोग कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है:
- 2022-2025 के आँकड़े:
- AI बाजार का आकार: $7.8 बिलियन (2022) से बढ़कर $17 बिलियन (2025) होने का अनुमान।
- स्टार्टअप्स: 1,200+ AI स्टार्टअप्स, जिनमें 2023-24 में $4 बिलियन से अधिक का निवेश।
- रोजगार: AI और डेटा साइंस में 1.2 मिलियन नौकरियाँ पैदा हुईं, लेकिन 20% पारंपरिक भूमिकाएँ स्वचालित हुईं।
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AI के लाभ और चुनौतियाँ
लाभ:
- स्वास्थ्य सेवा: AI से कैंसर और हृदय रोगों का पता लगाने में 30% सुधार।
- कृषि: AI-आधारित पूर्वानुमानों से किसानों की आय में 15-20% वृद्धि।
- शिक्षा: व्यक्तिगत शिक्षण सहायकों से छात्रों के प्रदर्शन में सुधार।
चुनौतियाँ:
- रोजगार पर प्रभाव: 2026 तक 10-15% पारंपरिक नौकरियों के स्वचालित होने का अनुमान।
- डेटा गोपनीयता: AI के लिए डेटा एकत्रीकरण से निजता संबंधी चिंताएँ।
- कौशल अंतर: 60% कर्मचारियों को AI-अनुकूल कौशल सीखने की आवश्यकता।
भविष्य की राह
- 2025-2028 के अनुमान:
- AI बाजार $30 बिलियन तक पहुँच सकता है।
- सरकार की ‘AI for All’ पहल से 5 मिलियन लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।
- AI से GDP में $500 बिलियन का योगदान संभव।
निष्कर्ष: भारत AI क्रांति का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है, लेकिन इसके साथ ही नीतिगत ढाँचे और कौशल विकास पर ध्यान देना आवश्यक है। जैसा कि सैम अल्टमैन ने कहा, भारत की रचनात्मकता और तकनीकी क्षमता उसे AI के क्षेत्र में विश्व नेता बना सकती है।