मुनक नहर एलिवेटेड कॉरिडोर अटका: हरियाणा की एनओसी नहीं मिलने से 5000 करोड़ की परियोजना पर संकट

Munak elevated corridor haryana noc pending

दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित 16 किलोमीटर लंबे मुनक नहर एलिवेटेड कॉरिडोर का रास्ता अभी भी साफ नहीं हो सका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरू करने के लिए हरियाणा सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का इंतजार है, जिसके चलते काम में विलंब हो रहा है।

राजधानी के यातायात संकट को कम करने के उद्देश्य से मुनक नहर के किनारे बनने वाले इस एलिवेटेड ट्रैक के लिए हरियाणा सरकार की हरी झंडी अब अनिवार्य हो गई है। सूत्रों के अनुसार, पड़ोसी राज्य से एनओसी न मिल पाने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। कुछ महीने पूर्व ही दिल्ली सरकार ने इस कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की थी।

करीब 5000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना का प्रस्ताव इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन से मुनक नहर के सहारे यूईआर-दो (अर्बन एक्सटेंशन रोड-2) तक है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अपने हालिया बजट भाषण में इस परियोजना का उल्लेख किया था। अब सूत्र बताते हैं कि दिल्ली और हरियाणा प्रशासन आपसी बातचीत से इस गतिरोध को दूर करने के प्रयासों में जुटे हैं।

हरियाणा ने उठाए ये सवाल

हरियाणा सरकार ने इस परियोजना को लेकर कई तकनीकी चिंताएं व्यक्त की हैं। राज्य के सिंचाई विभाग का कहना है कि वे मुनक नहर का रखरखाव करते हैं और समय-समय पर भारी मशीनों से नहर की सफाई (गाद निकालना) करते हैं। हरियाणा का सवाल है कि प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के बाद इन मशीनों की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने नहर की सुरक्षा को देखते हुए बनने वाले पिलरों के डिजाइन की विस्तृत जानकारी भी मांगी है।

पीडब्ल्यूडी ने दिया स्पष्टीकरण, लेकिन अब भी इंतजार

दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का कहना है कि हरियाणा सिंचाई विभाग द्वारा मांगी गई सभी जानकारियां उन्हें उपलब्ध करा दी गई हैं। पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि यह एलिवेटेड कॉरिडोर नहर के बिल्कुल ऊपर से नहीं गुजरेगा, जिससे ना तो नहर के रखरखाव में और ना ही सफाई मशीनों के संचालन में कोई बाधा उत्पन्न होगी।

एक पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना से केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि हरियाणा के नागरिकों को भी काफी लाभ मिलेगा। हालांकि, उधर से अभी आगे की कार्रवाई का जवाब आना बाकी है।

डीपीआर तैयार, अंतिम मंजूरी की उम्मीद

दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) लगभग अंतिम चरण में है। अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत होने और सभी जरूरी एनओसी पूरी होने के बाद ही परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपने की योजना है। फिलहाल, अंतिम निर्णय हरियाणा से मिलने वाली एनओसी और तकनीकी मंजूरी पर टिका है।

क्या होंगे फायदे?

इस 16 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने से उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली का सीधा संपर्क अर्बन एक्सटेंशन रोड (यूईआर) से हो जाएगा। इससे आउटर रिंग रोड नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। खास बात यह होगी कि दिल्ली-हरियाणा सीमा से मध्य दिल्ली तक बिना किसी सिग्नल के सीधा रास्ता मिलेगा, जो आईएसबीटी, वजीराबाद और आउटर रिंग रोड जैसे प्रमुख मार्गों को जोड़ देगा।

इससे हरियाणा से दिल्ली आने वाले लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी और दिल्ली के कई अन्य व्यस्त रास्तों पर भी ट्रैफिक का दबाव कम होगा। भविष्य में इस कॉरिडोर को आगे बढ़ाकर वजीराबाद तक ले जाने की भी योजना है, जिससे इसकी कुल लंबाई 20 किलोमीटर से भी अधिक हो सकती है। फिलहाल, सबकी निगाहें हरियाणा सरकार के जवाब पर टिकी हैं।