तीन दिन की ट्रांसपोर्ट हड़ताल से दिल्ली-NCR बेहाल, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली ऑटो टैक्सी हड़ताल

दिल्ली-NCR में 21 मई से शुरू हुई तीन दिवसीय ट्रांसपोर्ट हड़ताल ने लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली के साथ नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद में ऑटो, टैक्सी और कमर्शियल वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दे रही है। कई परिवहन यूनियनों ने इस “चक्का जाम” को समर्थन दिया है, जिससे रोजाना सफर करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सुबह ऑफिस जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत देखने को मिल रही है। कई इलाकों में कैब बुकिंग लगातार कैंसिल हो रही है, जबकि ऑटो की संख्या भी कम नजर आ रही है। लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और कई जगह surge pricing भी बढ़ गई है।

यूनियनों का कहना है कि पिछले करीब 15 वर्षों में ऑटो और टैक्सी किराए में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। दूसरी तरफ CNG, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। वाहन बीमा, परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट और मेंटेनेंस का खर्च भी काफी बढ़ चुका है।

ड्राइवर संगठनों ने ऐप आधारित कंपनियों जैसे Uber, Ola और Rapido पर भी सवाल उठाए हैं। यूनियनों का आरोप है कि ऐप कंपनियों के बढ़ते कमीशन के कारण ड्राइवरों की आमदनी प्रभावित हो रही है और मौजूदा किराया ढांचा महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

किन इलाकों में दिख सकता है सबसे ज्यादा असर?

नई दिल्ली, कनॉट प्लेस, गुरुग्राम साइबर सिटी, नोएडा सेक्टर 18, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे प्रमुख इलाकों में परिवहन सेवाओं पर ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। दिल्ली एयरपोर्ट रूट पर भी यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी जा रही है।

हड़ताल का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेवाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। कई ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने माल ढुलाई धीमी करने की चेतावनी दी है। इससे ग्रॉसरी, फल-सब्जियों और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

सड़क पर निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक जाम की स्थिति भी गंभीर हो सकती है। ऑफिस टाइम में दिल्ली-NCR की कई मुख्य सड़कों पर लंबा जाम लगने की आशंका है। मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ बढ़ सकती है और पार्किंग की समस्या भी सामने आ सकती है।

यूनियनों की क्या हैं मुख्य मांगें?

परिवहन संगठनों की सबसे बड़ी मांग ऑटो और टैक्सी किराए में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि ईंधन की कीमतों के अनुसार किराया तय किया जाना चाहिए। साथ ही ऐप कंपनियों के कमीशन को कम करने की भी मांग उठाई गई है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यानी All India Motor Transport Congress ने दिल्ली में कमर्शियल वाहनों पर लगाए गए Environment Compensation Charge (ECC) का भी विरोध किया है। यूनियनों का कहना है कि इस अतिरिक्त शुल्क से ट्रांसपोर्ट कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

इसके अलावा BS-IV कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध का भी विरोध किया जा रहा है। ड्राइवर संगठनों का दावा है कि इस फैसले से लाखों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है।

दिल्ली मेट्रो पर बढ़ सकता है दबाव

हड़ताल के चलते बड़ी संख्या में लोग Delhi Metro Rail Corporation की सेवाओं का सहारा ले सकते हैं। ऐसे में पीक आवर के दौरान मेट्रो स्टेशनों पर लंबी लाइनें और भारी भीड़ देखने को मिल सकती है। एयरपोर्ट लाइन और प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों से ज्यादा रहने की संभावना है।

हालांकि राहत की बात यह है कि दिल्ली-NCR की सभी ऑटो और टैक्सी यूनियन इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। कुछ संगठनों ने अपनी सेवाएं सामान्य रखने की बात कही है। यानी कई इलाकों में यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिल सकती हैं, लेकिन उपलब्धता कम रहने की आशंका बनी हुई है।

यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले घर से निकलें, मेट्रो को प्राथमिकता दें और कैब पहले से बुक करने की कोशिश करें। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को कम से कम 2 से 3 घंटे अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी जा रही है।

आगे और बढ़ सकता है आंदोलन

परिवहन यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार के साथ जल्द बातचीत नहीं हुई तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। कई संगठनों ने सरकार से तत्काल बैठक कर समाधान निकालने की मांग की है।

फिलहाल 21 से 23 मई तक चलने वाली इस ट्रांसपोर्ट हड़ताल का असर दिल्ली-NCR की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में हालात कितने सामान्य होते हैं, यह सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत पर निर्भर करेगा।