आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक बड़ा सियासी फेरबदल देखने को मिला है। पार्टी के सबसे चर्चित और युवा चेहरों में शामिल राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब पंजाब से ही राज्यसभा सांसद और मशहूर कारोबारी अशोक मित्तल को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी ने सिर्फ पद से हटाने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया कि सदन में पार्टी के कोटे से राघव चड्ढा को बोलने का समय न दिया जाए।
राघव चड्ढा पर कार्रवाई की वजह क्या?
पार्टी की ओर से इस बदलाव का कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। हालांकि राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से पार्टी के अहम मुद्दों पर राघव चड्ढा की चुप्पी और दूरी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
केजरीवाल मामले पर खामोशी बनी चर्चा का विषय
27 फरवरी को दिल्ली शराब नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निचली अदालत से राहत मिलने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने खुलकर प्रतिक्रिया दी थी। लेकिन राघव चड्ढा की ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया, जिसने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।
गौरतलब है कि राघव चड्ढा वर्ष 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने थे और उनका कार्यकाल 2028 तक है।
राघव आउट, अशोक मित्तल इन: कौन हैं नए उपनेता?
राघव चड्ढा की जगह लेने वाले अशोक मित्तल भी पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं। जालंधर निवासी मित्तल राजनीति में आने से पहले एक सफल उद्योगपति के रूप में पहचान बना चुके हैं।
- वे देश की प्रतिष्ठित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के फाउंडर और चांसलर हैं।
- उनका परिवार ‘लवली ग्रुप’ का मालिक है, जो ऑटोमोबाइल और ‘लवली स्वीट्स’ के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है।
- अशोक मित्तल भी 2022 में ही राज्यसभा सांसद चुने गए थे।
पार्टी से दूरी, लेकिन जनता के मुद्दों पर सक्रिय रहे राघव
भले ही पार्टी नेतृत्व को राघव चड्ढा की राजनीतिक भूमिका पर सवाल रहे हों, लेकिन संसद के पिछले दो सत्रों के रिकॉर्ड बताते हैं कि उन्होंने लगातार आम जनता से जुड़े मुद्दे उठाए।
राजनीतिक मुद्दों से इतर उन्होंने कई सामाजिक और आर्थिक विषयों पर सदन का ध्यान आकर्षित किया।
संसद में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
1. मोबाइल रीचार्ज और बैंक नियम
- 28 दिन वाले मोबाइल रीचार्ज सिस्टम को खत्म कर पूरे महीने (30/31 दिन) की वैधता लागू करने की मांग।
- बचा हुआ डेटा अगले महीने जोड़ने का सुझाव।
- बैंक खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाली पेनाल्टी खत्म करने का प्रस्ताव।
2. गिग वर्कर्स की समस्याएं
- जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म के डिलीवरी पार्टनर्स की कम आय।
- 10 मिनट डिलीवरी के दबाव और सामाजिक सुरक्षा की कमी का मुद्दा उठाया।
3. डिजिटल क्रिएटर्स की सुरक्षा
- इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन शिक्षकों को गलत कंटेंट टेकडाउन से बचाने के लिए कॉपीराइट एक्ट 1957 में संशोधन की मांग।
4. ‘वन नेशन, वन हेल्थ ट्रीटमेंट’
- पूरे देश में समान स्वास्थ्य उपचार व्यवस्था लागू करने की वकालत।
- निजी अस्पतालों की मनमानी पर चिंता जताई।
5. मिडिल क्लास को राहत
- विवाहित जोड़ों के लिए Joint Income Tax Filing का विकल्प।
- देश के 150 से अधिक एयरपोर्ट्स पर किफायती कैफे खोलने का सुझाव, ताकि यात्रियों को सस्ता भोजन मिल सके।
6. खाद्य सुरक्षा
- खाने-पीने की वस्तुओं और यूरिया में मिलावट के गंभीर मुद्दे को संसद में उठाया।
आगे क्या होगा राघव चड्ढा का राजनीतिक भविष्य?
भले ही राघव चड्ढा ने राज्यसभा उपनेता का पद खो दिया हो, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता और चर्चा लगातार बनी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी के आधिकारिक ‘स्पीकिंग टाइम’ के बिना राघव चड्ढा आगे अपनी राजनीतिक भूमिका और रणनीति कैसे तय करेंगे।
