नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के ‘वर्ल्ड क्लास एजुकेशन मॉडल’ पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल द्वारा शाहबाद डेयरी इलाके में स्थित एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 2020 में करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस चार मंजिला इमारत को अब ‘खतरनाक’ घोषित कर दिया गया है और इसे जल्द ही गिराया जाएगा।
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क्या देखा सांसद ने?
स्वाति मालीवाल ने निरीक्षण के दौरान पाया कि:
- पूरी चार मंजिला इमारत गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है।
- दीवारों और छत पर हर तरफ गहरी दरारें हैं।
- पूरी इमारत में सीलन और जलभराव के निशान हैं।
- आश्चर्यजनक रूप से, इतनी बड़ी इमारत में लैंटर (हवादार रोशनदान) तक नहीं बनाए गए।
- निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब है कि स्कूल को बंद करना पड़ा है।
जनता के पैसे की बर्बादी, जनता सवाल कर रही
इस मामले ने आम नागरिकों में गुस्सा पैदा कर दिया है। लोग सवाल पूछ रहे हैं: “हमारी मेहनत की कमाई से जो टैक्स दिया, वो इस तरह कैसे बर्बाद हो गया?” सिर्फ 4 साल में इमारत के खतरनाक होने का मतलब है कि निर्माण में गंभीर लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है। लोग जानना चाहते हैं कि इस फिजूलखर्ची की जिम्मेदारी किसकी है?
‘शिक्षा क्रांति’ पर उठे सवाल
यह मामला दिल्ली सरकार के दावों पर सीधा प्रहार है। आम आदमी पार्टी लगातार अपने ‘वर्ल्ड क्लास एजुकेशन मॉडल’ का ढिंढोरा पीटती रही है। लेकिन इस स्कूल की हालत देखकर साफ है कि सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर ध्यान देने की जरूरत है।
अब क्या?
सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले की जांच कौन करेगा? जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी? और सबसे बड़ा सवाल: क्या दिल्ली के अन्य स्कूलों की इमारतें भी ऐसी ही खराब गुणवत्ता से बनी हैं?
जनता की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न दोहराई जाए। शिक्षा के मंदिरों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इस पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।
Source: Twitter Handle : Swati Maliwal
