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ईरान की समुद्री बारूदी सुरंगों से वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा !

मध्य-पूर्व का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट इस समय वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं, जिससे यहां से गुजरने वाले तेल और गैस से भरे जहाजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि जो जहाज उसकी शर्तों या “टोल” का पालन नहीं करेंगे, उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। इसके जवाब में अमेरिका ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए नाकेबंदी और माइंस हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। यह टकराव अब सिर्फ दो देशों के बीच नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। यह खाड़ी देशों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है और दुनिया के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यहां किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो उसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर आम लोगों की जेब तक पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन रहा है।

ईरान के पास हजारों समुद्री सुरंगों का जखीरा

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास लगभग 5000 से 6000 समुद्री बारूदी सुरंगें मौजूद हैं। ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए ऐसी माइंस विकसित की हैं जो कम गहराई वाले पानी में भी बेहद प्रभावी साबित होती हैं। होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक बनावट इसे और खतरनाक बना देती है, क्योंकि यहां से गुजरने वाले जहाजों के पास बच निकलने के विकल्प सीमित होते हैं।

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घातक माइंस के प्रकार और उनका खतरा

सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, ईरान के पास महाम-3 (M-3) और महाम-7 (M-7) जैसी उन्नत बारूदी सुरंगें हैं। महाम-3 एक ‘मूर्ड माइन’ है जो समुद्र की सतह से जुड़ी रहती है और पानी के भीतर तैरती है, तथा जहाज के संपर्क में आते ही विस्फोट कर देती है। वहीं महाम-7 एक ‘लिम्पेट माइन’ है, जिसे गोताखोर जहाज के निचले हिस्से पर चिपका सकते हैं, जिससे हमला बेहद सटीक और खतरनाक हो जाता है। इसके अलावा, यूनाइटेड स्टेट्स नेवल इंस्टीट्यूट (USNI) के मुताबिक सदाफ-02 (SADAF-02) एक पारंपरिक माइन है जो जहाज के संपर्क में आते ही बड़े धमाके के साथ फट जाती है। 1988 में इसी तरह की माइन ने अमेरिकी युद्धपोत USS Samuel B. Roberts को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। इसके साथ ही इन्फ्लुएंस माइंस भी बेहद खतरनाक मानी जाती हैं, क्योंकि ये जहाज को छुए बिना ही सक्रिय हो जाती हैं। इनमें मैग्नेटिक, एकोस्टिक और प्रेशर सेंसर लगे होते हैं, जो पास से गुजरने वाले जहाज की हलचल को पहचानकर विस्फोट कर देते हैं।

अमेरिका का जवाब: नाकेबंदी और माइंस हटाने का अभियान

ईरान की बढ़ती गतिविधियों के बीच अमेरिका ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। अमेरिकी नौसेना ने इस क्षेत्र में नाकेबंदी की घोषणा की है और माइंस स्वीपिंग जहाजों को तैनात कर समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य न सिर्फ अपने जहाजों की सुरक्षा करना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बिना रुकावट जारी रखना भी है, हालांकि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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अब सबसे बड़ा सवाल ?

क्या होर्मुज स्ट्रेट आने वाले समय में एक बड़े सैन्य टकराव का केंद्र बनने जा रहा है? क्या समुद्री बारूदी सुरंगों का यह खेल वैश्विक तेल सप्लाई को ठप कर सकता है? और सबसे अहम—क्या दुनिया एक और बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है, या कूटनीति इस टकराव को समय रहते रोक पाएगी?

ईरान के पास हजारों समुद्री सुरंगों का जखीरा

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास लगभग 5000 से 6000 समुद्री बारूदी सुरंगें मौजूद हैं। ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए ऐसी माइंस विकसित की हैं जो कम गहराई वाले पानी में भी बेहद प्रभावी साबित होती हैं। होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक बनावट इसे और खतरनाक बना देती है, क्योंकि यहां से गुजरने वाले जहाजों के पास बच निकलने के विकल्प सीमित होते हैं।

घातक माइंस के प्रकार और उनका खतरा

सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, ईरान के पास महाम-3 (M-3) और महाम-7 (M-7) जैसी उन्नत बारूदी सुरंगें हैं। महाम-3 एक ‘मूर्ड माइन’ है जो समुद्र की सतह से जुड़ी रहती है और पानी के भीतर तैरती है, तथा जहाज के संपर्क में आते ही विस्फोट कर देती है। वहीं महाम-7 एक ‘लिम्पेट माइन’ है, जिसे गोताखोर जहाज के निचले हिस्से पर चिपका सकते हैं, जिससे हमला बेहद सटीक और खतरनाक हो जाता है। इसके अलावा, यूनाइटेड स्टेट्स नेवल इंस्टीट्यूट (USNI) के मुताबिक सदाफ-02 (SADAF-02) एक पारंपरिक माइन है जो जहाज के संपर्क में आते ही बड़े धमाके के साथ फट जाती है। 1988 में इसी तरह की माइन ने अमेरिकी युद्धपोत USS Samuel B. Roberts को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। इसके साथ ही इन्फ्लुएंस माइंस भी बेहद खतरनाक मानी जाती हैं, क्योंकि ये जहाज को छुए बिना ही सक्रिय हो जाती हैं। इनमें मैग्नेटिक, एकोस्टिक और प्रेशर सेंसर लगे होते हैं, जो पास से गुजरने वाले जहाज की हलचल को पहचानकर विस्फोट कर देते हैं।

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अमेरिका का जवाब: नाकेबंदी और माइंस हटाने का अभियान

ईरान की बढ़ती गतिविधियों के बीच अमेरिका ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। अमेरिकी नौसेना ने इस क्षेत्र में नाकेबंदी की घोषणा की है और माइंस स्वीपिंग जहाजों को तैनात कर समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य न सिर्फ अपने जहाजों की सुरक्षा करना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बिना रुकावट जारी रखना भी है, हालांकि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल ?

क्या होर्मुज स्ट्रेट आने वाले समय में एक बड़े सैन्य टकराव का केंद्र बनने जा रहा है? क्या समुद्री बारूदी सुरंगों का यह खेल वैश्विक तेल सप्लाई को ठप कर सकता है? और सबसे अहम—क्या दुनिया एक और बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है, या कूटनीति इस टकराव को समय रहते रोक पाएगी?

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