ओखला का कूड़े का पहाड़ बना मिसाल: 60 मीटर से घटकर 20 मीटर, अब बनेगा इको पार्क

Delhi kooda ka pahad

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट दिल्ली के ओखला इलाके में वर्षों से खड़ा कूड़े का पहाड़ अब बदलाव की कहानी लिख रहा है। कभी करीब 60 मीटर ऊंचा यह कचरे का ढेर अब घटकर लगभग 20 मीटर रह गया है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे बायो-माइनिंग अभियान और आधुनिक मशीनों की मदद से इस “कूड़े के पहाड़” को खत्म कर हरित क्षेत्र (Eco Park) में बदला जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

ओखला लैंडफिल साइट, जो दिल्ली के सबसे बड़े कचरा डंपिंग स्थलों में से एक रही है, अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। यहां वर्षों से जमा “लीगेसी वेस्ट” (पुराना कचरा) को वैज्ञानिक तरीके से हटाया जा रहा है।

👉 इस काम में ट्रोमेल मशीन (Trommel Machine) का उपयोग किया जा रहा है, जो कचरे को छांटकर अलग-अलग कैटेगरी में बांटती है।

कैसे हो रहा है कचरे का निस्तारण?

  • फरवरी और मार्च के दौरान करीब 6,300 मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट का निस्तारण किया गया
  • अब तक कुल मिलाकर लगभग 37,10,700 टन कचरा साफ किया जा चुका है
  • रोजाना 150–200 ट्रक कचरा हटाने में लगे हैं
  • यह काम 24 घंटे लगातार चल रहा है

इस प्रक्रिया को “बायो-माइनिंग” कहा जाता है, जिसमें पुराने कचरे को प्रोसेस करके उपयोगी संसाधनों में बदला जाता है।

62 एकड़ जमीन में बदलाव

  • कुल क्षेत्रफल: 62 एकड़
  • अब तक साफ: 34 एकड़
  • बाकी बचा: 28 एकड़

साफ की गई जमीन को अब हरित क्षेत्र में बदला जा रहा है।

कचरे से इको पार्क तक का सफर

सरकार की योजना है कि इस पूरे क्षेत्र को एक विशाल इको पार्क में बदला जाए। इसके तहत:

  • विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगाए जा रहे हैं
  • हरित क्षेत्र बढ़ाकर प्रदूषण और गर्मी को कम करने की कोशिश
  • रिसाइकिल किए गए कचरे का उपयोग लैंडस्केपिंग और पार्क निर्माण में

यह कदम दिल्ली में बढ़ते तापमान और वायु प्रदूषण से लड़ने में भी मददगार साबित हो सकता है।

पर्यावरण के लिए बड़ा कदम

ओखला का कूड़ा पहाड़ लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण रहा है — बदबू, प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएं। लेकिन अब:

✔️ कचरे का पहाड़ तेजी से खत्म हो रहा है
✔️ जमीन का पुनः उपयोग हो रहा है
✔️ हरियाली बढ़ रही है

राजनीतिक बयानबाजी बनाम जमीनी काम

इस प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है। जहां कुछ लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर हो रहा काम एक ठोस बदलाव दिखा रहा है।

एक नजर में उपलब्धियां

पहलूआंकड़े
कूड़े की ऊंचाई60 मीटर से घटकर 20 मीटर
कुल कचरा साफ37 लाख टन से ज्यादा
रोजाना ट्रक150–200
कुल जमीन62 एकड़
साफ जमीन34 एकड़
शेष28 एकड़

ओखला का कूड़े का पहाड़ अब सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि समाधान की मिसाल बनता जा रहा है। बायो-माइनिंग, ट्रोमेल मशीन और सतत प्रयासों की बदौलत यह क्षेत्र जल्द ही एक हरित इको पार्क में तब्दील हो सकता है।

यह बदलाव न सिर्फ दिल्ली की छवि सुधारने वाला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।