अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब सीधे चीन का नाम लेकर चेतावनी दी है। Fox Business के कार्यक्रम Sunday Morning Futures में होस्ट मारिया बार्तिरोमो ने ट्रंप से पूछा कि क्या उनकी 50 प्रतिशत टैरिफ की धमकी चीन के लिए भी है। ट्रंप ने जवाब दिया — “हां, और दूसरे देशों के लिए भी, लेकिन हां, चीन के लिए भी।” ट्रंप ने साफ कहा कि अगर चीन को हथियार देते हुए पकड़ा गया तो उसे 50 प्रतिशत टैरिफ मिलेगा जो एक “चौंका देने वाली रकम” है।
Truth Social पर किया था पहला ऐलान
इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा था कि ईरान को सैन्य हथियार देने वाले किसी भी देश पर अमेरिका को निर्यात होने वाले सभी सामान पर तत्काल 50 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। यह ऐलान उन्होंने उसी दिन किया जिस दिन अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम समझौता हुआ था। यानी एक हाथ से शांति का हाथ बढ़ाते हुए दूसरे हाथ से चीन और रूस को कड़ा संदेश दिया।
क्या यह धमकी कानूनी तौर पर लागू हो सकती है?
इस टैरिफ धमकी की असली ताकत को लेकर विशेषज्ञ संशय में हैं। फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के सबसे तेज और व्यापक टैरिफ लगाने के कानूनी हथियार यानी इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट को असंवैधानिक करार दे दिया था। अटलांटिक काउंसिल के विशेषज्ञ जोश लिप्स्की का कहना है कि यह धमकी मुख्य रूप से चीन को निशाना बनाती है और बीजिंग इसे उसी तरह पढ़ेगा। हालांकि उनका यह भी मानना है कि ट्रंप अगले महीने बीजिंग दौरे पर जाने वाले हैं इसलिए फिलहाल यह टैरिफ लागू करना मुश्किल है।
चीन-अमेरिका व्यापार पर असर कितना बड़ा?
अगर यह टैरिफ वाकई लागू होता है तो इसके आर्थिक नतीजे बेहद गंभीर होंगे। पिछले कई वर्षों में अमेरिकी टैरिफ की वजह से चीन से अमेरिकी आयात 2018 के 538 अरब डॉलर के शिखर से घटकर 2025 में 308 अरब डॉलर पर आ गया था। 50 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ न सिर्फ चीन बल्कि अमेरिकी आयातकों और उपभोक्ताओं के लिए भी भारी पड़ सकता है।
चीन का जवाब — “हम तटस्थ हैं”
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि चीन ने ईरान मुद्दे पर हमेशा खुला और पारदर्शी रुख अपनाया है और शांति वार्ता को बढ़ावा देने के लिए काम किया है। साथ ही अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह साफ देख सकता है कि कौन कहता कुछ है और करता कुछ और है।
अमेरिकी तेल खरीदो — ट्रंप की नई चाल
धमकी के साथ-साथ ट्रंप ने चीन को एक रास्ता भी दिखाया। उन्होंने चीन से कहा कि वह ईरानी तेल की जगह अमेरिकी तेल खरीदे। होर्मुज जलसंधि पर बढ़ते तनाव के बीच यह पेशकश अहम मानी जा रही है क्योंकि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
दांव पर है पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था
अब सवाल यह है कि चीन झुकेगा या अपनी चाल पर कायम रहेगा। एक तरफ ट्रंप की 50 प्रतिशत टैरिफ की तलवार है, दूसरी तरफ ईरान के साथ चीन की दशकों पुरानी रणनीतिक दोस्ती और उसके तेल पर निर्भरता। मई में ट्रंप-शी मुलाकात होने वाली है, लेकिन उससे पहले अगर चीन ने ईरान को हथियार दिए तो यह मुलाकात होगी भी या नहीं — यह भी तय नहीं। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह तनाव अब सिर्फ कूटनीतिक नहीं रहा — यह वैश्विक बाजारों, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शांति सभी के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।
