अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम के बीच अब एक बड़ा खुलासा सामने आया है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है। यह जानकारी तीन ऐसे सूत्रों ने दी है जो हाल की खुफिया रिपोर्टों से परिचित हैं।
संघर्षविराम के बीच हथियारों की तैयारी
यह कदम उस लिहाज से बेहद उकसावे वाला माना जा रहा है क्योंकि बीजिंग ने खुद दावा किया था कि उसने इसी सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते में मध्यस्थता की थी। यानी एक तरफ शांति दूत की भूमिका, दूसरी तरफ ईरान को चुपके से हथियार पहुंचाने की तैयारी — चीन की इस दोहरी चाल ने अमेरिका को हिला दिया है। खुफिया रिपोर्ट यह भी बताती है कि ईरान इस युद्धविराम का इस्तेमाल अपने हथियारों के भंडार को फिर से भरने के मौके के तौर पर कर सकता है। दो सूत्रों ने यह भी बताया कि बीजिंग इन हथियारों की खेप को तीसरे देशों के रास्ते भेजने की योजना बना रहा है ताकि उनकी असली उत्पत्ति छिपाई जा सके।
MANPADS — वो हथियार जिसने अमेरिकी लड़ाकू विमान गिराया
चीन जो हथियार ईरान को देने की तैयारी में है वह है MANPADS यानी मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम। ये कंधे पर रखकर दागी जाने वाली एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें हैं जिन्हें एक अकेला व्यक्ति भी आसानी से ऑपरेट कर सकता है। इन्हें छिपाना और इस्तेमाल करना बेहद आसान होता है। 3 अप्रैल को ईरान के ऊपर एक अमेरिकी लड़ाकू विमान मार गिराया गया था, जिसके बाद से चीनी हथियारों की खेप को लेकर अमेरिका की चिंता और गहरी हो गई है। ट्रंप ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह विमान एक हैंडहेल्ड शोल्डर मिसाइल से मारा गया था, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह हथियार चीनी निर्मित था या नहीं।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस से रवाना होते हुए पत्रकारों से सीधे शब्दों में कहा कि अगर चीन ऐसा करता है तो उसे बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले ट्रंप ने Truth Social पर एक पोस्ट में ऐलान किया था कि ईरान को सैन्य हथियार देने वाले किसी भी देश पर अमेरिका को निर्यात होने वाले सभी सामान पर तत्काल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। कोई छूट नहीं, कोई अपवाद नहीं।
चीन की रणनीति क्या है?
खुफिया सूत्रों का कहना है कि चीन इस संघर्ष में सीधे उतरने में कोई रणनीतिक फायदा नहीं देखता और जानता है कि अमेरिका-इजरायल के खिलाफ यह जंग जीतना संभव नहीं। इसके बजाय बीजिंग खुद को ईरान का दोस्त बनाए रखना चाहता है क्योंकि ईरान का तेल चीन के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही वह बाहरी तौर पर तटस्थ दिखता रहे ताकि युद्ध के बाद भी साफ हाथ का दावा कर सके। गौरतलब है कि 2021 में दोनों देशों के बीच 25 साल का व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौता हुआ था जिसमें ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीक में गहरे सहयोग का ढांचा तैयार किया गया था।
चीन का इनकार, लेकिन सवाल बरकरार
वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने कभी किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं और यह जानकारी गलत है। साथ ही अमेरिका से
