राजपाल यादव चेक बाउंस केस क्या है

राजपाल यादव चेक बाउंस केस क्या है? ₹9 करोड़ के कर्ज से तिहाड़ जेल पहुंचे एक्टर, सोनू सूद ने बढ़ाया मददगार हाथ

बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव आजकल चर्चा में हैं, लेकिन वजह कोई फिल्म या कॉमेडी नहीं, बल्कि ₹9 करोड़ के चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल जाना है। इस केस ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। अब सोनू सूद ने राजपाल यादव की मदद के लिए ₹5 करोड़ की फिल्म ऑफर की है। आइए जानते हैं कि आखिर राजपाल यादव चेक बाउंस केस क्या है और पूरा मामला कैसे शुरू हुआ।

राजपाल यादव चेक बाउंस केस क्या है? पूरा मामला समझिए

राजपाल यादव चेक बाउंस केस क्या है, यह सवाल हर किसी की जुबान पर है। यह मामला साल 2010 में बनी फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। इस फिल्म के निर्माण के दौरान राजपाल यादव ने एक प्रोड्यूसर से ₹9 करोड़ का कर्ज लिया था। यह पैसा फिल्म की शूटिंग और अन्य खर्चों के लिए लिया गया था।

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समझौते के मुताबिक, राजपाल यादव को यह पैसा एक निश्चित तारीख पर वापस लौटाना था। उन्होंने पैसे वापस करने के लिए एक चेक दिया, लेकिन वह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद प्रोड्यूसर ने नीदरलैंड बेस्ड कंपनी फोर्थ प्लेनिट टेक्नोलॉजीज के माध्यम से राजपाल यादव के खिलाफ कानूनी केस दर्ज करा दिया।

केस की पूरी टाइमलाइन: कब और क्या हुआ?

सालघटना
2010राजपाल यादव ने फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए ₹9 करोड़ का कर्ज लिया
2011कर्ज चुकाने के लिए दिया गया चेक बाउंस हुआ
2012प्रोड्यूसर ने राजपाल के खिलाफ केस दर्ज कराया
2018दिल्ली की अदालत ने राजपाल यादव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया
2024सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
फरवरी 2025राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया

राजपाल यादव ने क्यों सरेंडर किया? भावुक पल

3 फरवरी 2025 को राजपाल यादव ने दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर किया। सरेंडर करने से पहले उन्होंने मीडिया से बात की और बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा:

“मैंने 30 साल इंडस्ट्री को दिए, लेकिन आज कोई मेरा नहीं है। आर्थिक तंगी के चलते मैं ₹9 करोड़ नहीं चुका पाया। फिल्म इंडस्ट्री में मैं बिल्कुल अकेला हूं।”

उनकी इस भावुक अपील के बाद सोनू सूद ने मदद का हाथ बढ़ाया और उन्हें अपनी अगली फिल्म में काम देने का ऐलान किया।

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सोनू सूद ने फिल्म ऑफर की

सोनू सूद ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ किया कि यह कोई चैरिटी या दान नहीं है, बल्कि एक प्रतिभाशाली कलाकार को सम्मान देने का तरीका है। उन्होंने लिखा:

“राजपाल यादव जी सिर्फ मेरे सह-कलाकार नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की धरोहर हैं। उनकी प्रतिभा को कभी भी आर्थिक तंगी से नहीं मापा जा सकता। मैं उन्हें अपनी अगली फिल्म में ले रहा हूं और ₹5 करोड़ का साइनिंग अमाउंट दे रहा हूं।”

सोनू सूद ने फिल्म इंडस्ट्री के दूसरे निर्माताओं से भी अपील की है कि वे राजपाल यादव को काम दें और उनकी मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़े हों।

चेक बाउंस केस: कानूनी पहलू समझिए

राजपाल यादव चेक बाउंस केस क्या है, इसे कानूनी भाषा में समझें तो यह एनआई एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत दर्ज किया गया मामला है। यह धारा चेक बाउंस होने पर लागू होती है, जब बैंक खाते में पर्याप्त पैसा न होने की वजह से चेक क्लियर नहीं होता।

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धारा 138 के तहत सजा:

  • 2 साल तक की जेल
  • चेक की रकम का दोगुना जुर्माना
  • दोनों सजाएं एक साथ भी हो सकती हैं

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, राजपाल यादव चेक बाउंस केस में उनकी मुश्किल यह है कि यह मामला 15 साल से लंबित है और सुप्रीम कोर्ट भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है। अब उनके पास या तो पूरा पैसा चुकाने का विकल्प है या फिर सजा काटने का।

बॉलीवुड सेलेब्स का रिएक्शन

इस मामले में अब तक सिर्फ सोनू सूद ही आगे आए हैं। बाकी बॉलीवुड सेलेब्स चुप्पी साधे हुए हैं। राजपाल यादव के फैंस सोशल मीडिया पर उनके लिए समर्थन जुटा रहे हैं और दूसरे स्टार्स से भी मदद की अपील कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. राजपाल यादव चेक बाउंस केस क्या है?

यह साल 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए लिए गए ₹9 करोड़ के कर्ज से जुड़ा मामला है, जब राजपाल यादव का दिया चेक बाउंस हो गया था।

2. राजपाल यादव को कितनी सजा हो सकती है?

एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत उन्हें 2 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

3. सोनू सूद ने राजपाल यादव को कितने पैसे दिए?

सोनू सूद ने राजपाल यादव को ₹5 करोड़ की फिल्म ऑफर की है, जो साइनिंग अमाउंट के तौर पर दिया जाएगा।

4. क्या राजपाल यादव जेल से बाहर आ सकते हैं?

अगर वह पूरा ₹9 करोड़ का कर्ज चुका देते हैं या किसी तरह की सजा में छूट मिलती है, तो बाहर आ सकते हैं।

पाठकों के लिए निष्कर्ष

राजपाल यादव चेक बाउंस केस हमें सिखाता है कि फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध के पीछे कितनी बड़ी आर्थिक अनिश्चितताएं हैं। यह मामला सिर्फ एक एक्टर का नहीं, बल्कि हर उस कलाकार की कहानी है जो अपने करियर के उतार-चढ़ाव में अकेला पड़ जाता है।

सोनू सूद का यह कदम साबित करता है कि मुश्किल वक्त में इंसानियत ही सबसे बड़ी पूंजी है। राजपाल यादव के लिए उम्मीद की एक किरण जगी है। अब देखना होगा कि बाकी फिल्म इंडस्ट्री उनके साथ कितना खड़ी होती है।

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