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दिल्ली-गुरुग्राम मेट्रो की भीड़भाड़ पर संसद में गूंजी आवाज, स्वाति मालीवाल ने उठाया यात्रियों का मुद्दा

दिल्ली से गुरुग्राम की ओर प्रतिदिन यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को मेट्रो की भीड़भाड़ और कम आवृत्ति के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में संसद भवन में सांसद स्वाति मालीवाल ने इस मुद्दे को उठाया, जिससे इस समस्या पर राष्ट्रीय ध्यान केंद्रित हुआ।

स्वाति मालीवाल ने संसद में कहा कि दिल्ली मेट्रो की वर्तमान सेवाएं दिल्ली से गुरुग्राम के बीच यात्रा करने वाले दैनिक यात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं। उन्होंने मेट्रो की आवृत्ति बढ़ाने और भीड़भाड़ कम करने के लिए ठोस योजना की मांग की, ताकि दैनिक यात्रियों को राहत मिल सके।

दिल्ली मेट्रो की वर्तमान स्थिति:

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के अनुसार, 2023 में सप्ताह के दिनों में औसतन 67 लाख पैसेंजर जर्नी दर्ज की गई, जो अनुमानित 62 लाख से लगभग 8% अधिक है। यह दर्शाता है कि मेट्रो सेवा की मांग लगातार बढ़ रही है।

हालांकि, IIT-दिल्ली और द इन्फ्राविजन फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश मेट्रो रेल नेटवर्क में सवारियों की संख्या अपेक्षित स्तर से 50% कम है। दिल्ली मेट्रो ने अपनी अनुमानित सवारियों का केवल 47.45% ही हासिल किया है। यह संकेत देता है कि मेट्रो सेवाओं की योजना और वास्तविक उपयोग में बड़ा अंतर है।

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आवश्यक कदम:

  1. मेट्रो की आवृत्ति बढ़ाना: दिल्ली से गुरुग्राम के बीच मेट्रो की आवृत्ति बढ़ाने से भीड़भाड़ कम हो सकती है, जिससे यात्रियों को सुविधा होगी।
  2. अंतिम मील कनेक्टिविटी सुधारना: मेट्रो स्टेशनों से गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस सेवाओं या अन्य सार्वजनिक परिवहन के साथ बेहतर समन्वय आवश्यक है।
  3. किफायती किराया संरचना: यात्रियों के लिए मेट्रो यात्रा किफायती बनाना आवश्यक है, ताकि अधिक लोग इस सेवा का उपयोग कर सकें।
  4. विस्तृत योजना और अध्ययन: मेट्रो सेवाओं की मांग और उपयोग के बीच के अंतर को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन आवश्यक है, ताकि भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी हो सकें।

दिल्ली मेट्रो ने शहर के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन बढ़ती मांग के साथ, सेवाओं में सुधार और विस्तार जरूरी हो गया है। सांसद स्वाति मालीवाल द्वारा उठाया गया यह मुद्दा समयोचित है और उम्मीद है कि संबंधित प्राधिकरण इस पर जल्द आवश्यक कदम उठाएंगे।

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