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Kailash Mansarovar Yatra: भारत-चीन के बीच सहमति: कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त 2025 तक फिर से शुरू होगी

भारत और चीन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा को जून से अगस्त 2025 के बीच फिर से आरंभ करने पर सहमति जताई है। कोविड-19 महामारी और सीमा संबंधी तनाव के चलते बीते वर्षों में यह यात्रा स्थगित रही थी। अब, दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग के सकारात्मक संकेत के तहत तीर्थयात्रियों के लिए यह यात्रा पुनः संभव होगी।

कैलाश मानसरोवर का आध्यात्मिक महत्व

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिन्दू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माने जाते हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवास स्थान है और मानसरोवर झील को ब्रह्मा द्वारा सृजित पवित्र जलाशय माना जाता है। यहाँ स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

बौद्ध धर्म में कैलाश को मेरु पर्वत के रूप में पूजा जाता है, जो ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता है। जैन धर्म में यह स्थल प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के निर्वाण स्थान के रूप में प्रतिष्ठित है। वहीं बोन धर्म के अनुयायी भी इसे अत्यधिक पवित्र मानते हैं। इस प्रकार, कैलाश मानसरोवर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि विभिन्न सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

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यात्रा का मार्ग और प्रक्रिया

कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित की जाती है। तीर्थयात्री दो मुख्य मार्गों के माध्यम से यात्रा कर सकते हैं:

  1. लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड के माध्यम से): यह परंपरागत और अधिक प्रचलित मार्ग है। यात्रा पिथौरागढ़ जिले से प्रारंभ होकर लिपुलेख दर्रे के माध्यम से तिब्बत में प्रवेश करती है।
  2. नाथू ला दर्रा (सिक्किम के माध्यम से): यह मार्ग अपेक्षाकृत नया है और गंगटोक से होकर मानसरोवर तक पहुँचता है। यह मार्ग वरिष्ठ नागरिकों और कम चलने में सक्षम यात्रियों के लिए सुविधाजनक माना जाता है, क्योंकि यहाँ अधिकतर यात्रा वाहन से होती है।

यात्रा के लिए इच्छुक श्रद्धालुओं को विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदकों का चयन कंप्यूटर द्वारा लॉटरी के जरिए किया जाता है। चयनित यात्रियों को मेडिकल परीक्षण, शारीरिक फिटनेस प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

यात्रा में कुल अवधि लगभग 20 से 25 दिन होती है और इसका खर्च 1 लाख रुपये तक आ सकता है, जिसमें यात्रा शुल्क, आवास, भोजन और बीमा शामिल होते हैं।

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यात्रियों के लिए सुझाव और सावधानियां

  • स्वास्थ्य परीक्षण: कैलाश मानसरोवर यात्रा उच्च हिमालयी क्षेत्र में होती है, जहाँ ऑक्सीजन की कमी और मौसम की विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अतः स्वास्थ्य परीक्षण और ऊँचाई के लिए तैयारी अत्यंत आवश्यक है।
  • शारीरिक तैयारी: नियमित व्यायाम, लंबी पैदल यात्राओं का अभ्यास और मानसिक रूप से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की तैयारी करनी चाहिए।
  • समूह यात्रा: कठिन परिस्थितियों में अकेले यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। समूह में यात्रा करने से सहायता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होती हैं।
  • दस्तावेजों की तैयारी: पासपोर्ट, चीन का वीज़ा, यात्रा बीमा और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी अनुमति पत्र समय से तैयार रखें।
  • जलवायु अनुकूलन: यात्रा से कुछ सप्ताह पूर्व उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रेकिंग कर शरीर को तैयार करना उपयोगी रहेगा।

यात्रा का व्यापक महत्व

कैलाश मानसरोवर यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह मानव जीवन के धैर्य, श्रद्धा, आत्म-नियंत्रण और साहस की भी परीक्षा है। यह यात्रा भारत और चीन के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी माध्यम बनती है। दोनों देशों द्वारा इस यात्रा को पुनः शुरू करना वैश्विक स्तर पर शांति, सहयोग और विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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भारत सरकार ने इस वर्ष यात्रा मार्गों में बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ बनाने, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने तथा आव्रजन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। इससे यात्रियों के अनुभव को पहले से अधिक सुरक्षित और सहज बनाया जा सकेगा।

निष्कर्ष

कैलाश मानसरोवर यात्रा आस्था, साहस और साधना का अद्भुत संगम है। यात्रा का पुनः आरंभ श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत सुखद समाचार है। यदि आप इस यात्रा का हिस्सा बनने की योजना बना रहे हैं, तो अभी से अपनी तैयारी प्रारंभ करें, स्वास्थ्य पर ध्यान दें, और सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को समय पर पूर्ण करें।

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